दरभंगा : बिहार की सांस्कृतिक व मिथिला की अघोषित राजधानी एव विधा के बल पर पूरी दुनिया में अपना नाम का डंका बजाने वाला दरभंगा एतिहासिक क्षण का गवाह होगा .बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ,अलीगढ विश्वविद्यालय ,पटना विश्वविद्यालय ,संस्कृत विश्वविद्यालय ,मिथिला विश्वविद्यालय ,सहित अनेको शिक्षण संस्थानों की स्थापना में महती भूमिका निभाने वाले दरभंगा राज का लक्ष्मेश्वर विलास पैलेस ,रामबाग किला परिसर ,मोती महल ,नरगौना पैलेस ,विशेश्वर विलाश पैलेस आदि अंग्रेज के जमाने से ही एक से एक नामचीन हस्तियों से रु-ब -रु होते रहे है .देश के नामी कलाकारों को इसने देखा है लेकिन मायानगरी के सितारों से इसकी पहली मुलाक़ात मैथिलि फिल्म फेस्टिवल में होगी Saturday, 19 January 2013
एतिहासिक क्षण का गवाह होगी बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा
दरभंगा : बिहार की सांस्कृतिक व मिथिला की अघोषित राजधानी एव विधा के बल पर पूरी दुनिया में अपना नाम का डंका बजाने वाला दरभंगा एतिहासिक क्षण का गवाह होगा .बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ,अलीगढ विश्वविद्यालय ,पटना विश्वविद्यालय ,संस्कृत विश्वविद्यालय ,मिथिला विश्वविद्यालय ,सहित अनेको शिक्षण संस्थानों की स्थापना में महती भूमिका निभाने वाले दरभंगा राज का लक्ष्मेश्वर विलास पैलेस ,रामबाग किला परिसर ,मोती महल ,नरगौना पैलेस ,विशेश्वर विलाश पैलेस आदि अंग्रेज के जमाने से ही एक से एक नामचीन हस्तियों से रु-ब -रु होते रहे है .देश के नामी कलाकारों को इसने देखा है लेकिन मायानगरी के सितारों से इसकी पहली मुलाक़ात मैथिलि फिल्म फेस्टिवल में होगी बढाया मिथिला का नाम और मान
दरभंगा : प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रहलाद शर्मा ,महंथ मोहन दास ,केदार नाथ चौधरी ,एच एम मुंशी बाल कृष्ण झा ,मणि कांत मिश्रा ,संजय पुंज , बी के हाउस ,जीतेन्द्र झा ,धीरेन्द्र मोरबैता ,संदीप झा ,रुपेश मिश्रा निर्देशक फणी मजुमदार, चौधरी परमानंद ,मुरलीधर ,संतोष बादल ,अभिजित कुमार सिंह,सूरज तिवारी ,मनोज झा , मनोज श्रीपती झा ,प्रवीन कुमार ,विकाश झा ,प्रकाश झा गायको में रविन्द्र ठाकुर ,उदित नारायण, दीपा नारायण ,पवन नारायण ,राम बाबू झा ,कुञ्ज बिहारी ,ज्ञानेश्वर दुब्बे ,विनोद गवार ,ललितेश ,संजय मिश्रा ,राजिव सिंह,धीरेन्द्र मोरबैता ,हेमेद्र लाभ ,रवि खंडेलवाल ,राम सेवक ठाकुर ,उषा पासवान ,अनुराधा, ,मनोज बाजपाई ,ललन सिंह ,रोमी ठाकुर ,विभूति भूषण ,नरेन्द्र झा ,आलोक नाथ ,धीरेन्द्र प्रेमर्शी ,श्याम नन्द झा ,बिपिन कुमार, शम्भुनाथ मिश्रा ,दिनेश मिश्रा ,उत्तम कुमार चौधरी ,अमरेश कुमार झा ,सुधा झा ,कल्पना मिश्रा ,आर एस गिरी सहित अनेको लोगो ने बेहतर मुकाम हासिल कर मिथिला का नाम और मान को बढाया ,वही सांस्कृतिक विरासत की धनि मिथिला के अनेको कलाकारों व निर्माता -निर्देशक फिल्म ,टी वी सीरियलों में जलवे बिखेरे संतोष बादल सरीखे प्रतिभा के धनि युवाओं ने मिथिला की सांस्कृतिक यात्रा को आगे बढाने में सशक्त भूमिका अदा की रास्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डाक्यूमेंट्री फिल्म नैना जोगिन के निर्माता प्रवीन कुमार सहित रक्त तिलक के निर्देशक मनोज श्रीपति झा आदि ने मिथिला और मैथिलि का झंडा बुलंद किया ये नाम उदाहरण भर है सैकड़ो ऐसी प्रतिभाए है जो आज भी फिल्मो टी वी सीरियलो में सक्रिय है ,लेकिन विडम्बना ही है की मैथिली फिल्म के नाम पर उपलब्धिया बल्लियों उछालने वाला नही रहा
Sunday, 13 January 2013
मैथिली सिनेमा का 50 वर्ष
दरभंगा : राजनितिक मानचित्र से बेदखल कर दी गई मिथिला विकास के मामले में भले ही दरिद्रता झेलने को अभिशप्त रही है ,लेकिन सभ्यता ,संस्कृति ,कला ,साहित्य ,संगीत का डंका देश दुनिया में बजाती आई है . नई डगर पर चलने में यह हिचकती रही और तजबीज करना इसकी आदत रही ,लेकिन मायानगरी की तरफ कदम बढाने में इसने बहुत देर नही की ,सीने - संसार के इतिहास में मिथिला तकरीबन 78 साल पूर्व महाकवि विधापति के साथ खड़ी मिलती है .बीसवीं सदी के तीसरे दशक में बनी फिल्म विधापति में मिथिला खिलखिलाती हुई स्वागत करती है .इतिहास -पुरुष मिथिला नरेश शिव सिंह और महाकवि विद्यापति को लेकर बनी इस फिल्म में पृथ्वी राज कपूर ,पाढ़ी सान्याल ,कानन देवी ,के सी डे ,के एन सिंह ,केदार शर्मा ,छाया देवी ने भूमिका की थी .मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा के सपूत प्रहलाद शर्मा ने भी भारत भूषण ,नजिमा मुराद ,विपिन गुप्ता ,सिम्मी ,कंवलजीत को लेकर 1960 के दशक में विद्यापति फिल्म बनाई .इसमें मोहम्मद रफी व लता मंगेशकर ने मैथिली गीत भी गाए .प्रहलाद शर्मा ऐसा नाम है जिन्होंने दरभंगा सरीखे कस्वाई शहर में भले ही जन्म लिया ,लेकिन भारतीय सिने - संसार को संजीव कुमार एवं हेमा मालिनी को लेकर बनाई गई फिल्म धुप छाव सहित आधा दर्जन फिल्मो के निर्देशक रहे .वही राज कपूर की फिल्म तिसरी कसम में चौधरी परमानन्द के द्वारा चाह की दूकान का संवाद सहित अन्य गतिविधियों ने मैथिली को नई राह दी .मैथिली फिल्म - निर्माण के प्रयास शुरू हुए और आज मैथिली फिल्म अपने 50 साल की यात्रा पूरी कर रही है .भले ही फिल्म निर्माण प्रदर्शन में देर हुई ,लेकिन अब तक पाचं दर्जन से अधिक फिल्म मैथिली में बन चुकी है .अतीत से झाकती मैथिली फिल्म "अपराजिता " भले ही पूर्ण नही हो सकी लेकिन गतिरोध टूटा ममता गाबय गीत ,कन्यादान ,जय बाबा बैधनाथ ,भौजी माय ,ललका पाग ,गोनू झा , हमरा लग रहब ,सस्ता जिनगी महग सेनुर ,आउ पीया हमर नगरी .कखन हरब दुःख मोर ,सेनुरक लाज ,दुलरुआ बाबू , गरीबक बेटी ,मायक कर्ज ,काजर ,पीया संग प्रीत करब कोना ,सेनुरिया ,सजना के अंगना में सोलह सिंगार ,मुखिया जी आदि बड़े पर्दे की फिल्म व सीडी फार्मेट की दर्जनों फिल्मे बनी .कई ने धमाल मचाया तो कई घोषणाओं में ही सिमट गई .कुछ डिब्बे में बंद रह गई .परिणाम ज्यादा उत्साहवर्द्धक नही रहे .लेकिन इसने सिने - जगत को मिथिला के दरभंगा ,मधुबनी ,समस्तीपुर ,बेगुसराय ,कटिहार ,खगड़िया ,सहरसा ,मधेपुरा ,सुपौल ,पूर्णिया ,किशनगंज ,सीतामढ़ी ,शिवहर ,मुजफ्फरपुर ,बेतिया ,मोतिहारी ,वैशाली सहित नेपाल के विभिन्न जिलो से सैकड़ो की तादाद में निर्माता ,निर्देशक ,अभिनेता सह कलाकार,गायक संगीतकार तकनिकी क्षेत्र में दिए .
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